बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित 70वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने आज पटना में एक विशाल प्रदर्शन का ऐलान किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियों और असंतोषजनक चयन प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में हजारों छात्रों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
छात्रों का संगठित आंदोलन
प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए अभ्यर्थियों ने पटना के मुसल्लहपुर हाट, जो कोचिंग संस्थानों का प्रमुख केंद्र है, में जाकर छात्रों से समर्थन मांगा है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न जिलों में भी अभ्यर्थी जागरूकता अभियान चला रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इस आंदोलन का हिस्सा बन सकें।
गर्दनीबाग में शिक्षा सत्याग्रह जारी
शिक्षक रहमांशु सर, जो 18 दिसंबर से छात्रों के साथ गर्दनीबाग में चल रहे शिक्षा सत्याग्रह में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, ने कहा,
“छात्र एक बार फिर पटना की सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। वे अहिंसक और गांधीवादी तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं।”
परीक्षा परिणाम पर गंभीर सवाल
छात्र नेता सौरभ कुमार ने परीक्षा के परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि,
- 13 दिसंबर को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों में सिर्फ 6.3% छात्र सफल हुए।
- 4 जनवरी को परीक्षा देने वालों की सफलता दर 19.2% रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह असमान्य आंकड़े दर्शाते हैं कि परीक्षा परिणामों में हेरफेर किया गया है, ताकि कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को लाभ दिया जा सके।
पटना हाईकोर्ट में सुनवाई
अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद, पटना हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। परीक्षा को रद्द करने को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन्हें हाईकोर्ट ने एक साथ जोड़ दिया है। इस महत्वपूर्ण मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
BPSC परीक्षा को लेकर उठे विवाद ने बिहार की शिक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह आंदोलन न केवल परीक्षा परिणाम को लेकर है, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी उठाया गया कदम है।